About Guruji

जो कुछ भी तू करता है, उसे भगवान के अर्पण करता चल। ऐसा करने से सदा जीवन-मुक्त का आनंन्द अनुभव करेगा।
भगवान कृष्ण के प्रेम में सब कुछ नियंत्रित कर सकते हैं
आनंद ही श्रीकृष्ण हैं , श्रीकृष्ण ही आनंद है
मन की शांति भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद है

ब्रह्मनिष्ठ पूज्य सदगुरु श्री रितेश्वर जी दासानुदास बाल्यकाल से ही अद्भुत आध्यात्मिक प्रतिभा संपन्न रहे हैं। सनातन धर्म के प्रति उनका लगाव व् समर्पण अतुलनीय है ।
गुरुदेव ने विधिवत विज्ञान के हर क्षेत्र की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उपरांत मेडिकल की डिग्री प्राप्त की । इन सब के दौरान उनकी आध्यात्मिक साधना साथ साथ चलती रही ।तत्पश्चात वे देशाटन एवं तपश्चर्या हेतु निकल पड़े ।पूज्य गुरुदेव की तपःस्थली त्रिकूट पर्वत ,कैमूर व् उत्तराखंड की पहाड़ियां और जंगल , ब्रज चौरासी कोस ,काशी ( वाराणसी ) तथा वृन्दावन रहीं ।
पूज्य गुरुदेव ने नारद की प्रेमा भक्ति ,वल्लभाचार्य तथा चैतन्यमहाप्रभु की विधाओं का संवर्धन करते हुए अन्य संतों सद्गुरुओं को अपने अंदर समाहित किया हैं । वैसे तो उनकी राम कथा, हरि कथा , भक्तमाल कथा सभी हृदयस्पर्शी होती हैं लेकिन प्रेमा भक्ति के परमाचार्य गुरुदेव का सबसे प्रिय श्रीमद्भागवत महापुराण है , सरस्वती सदैव उनके कंठ में विराजती है और सात सात आठ आठ घंटे निर्बाध कथा उनके मुखारबिन्द से निर्झर प्रवाहित होती है । श्रीमद्भागवत महापुराण के बारे में गुरुदेव कहते हैं कि दुनियाँ में ऐसा कोई प्रश्न नहीं जिसका उत्तर श्रीमद्भागवत में न हो , यदि भागवत में किसी प्रश्न का उत्तर नमिला तो दुनियाँ में और कहीं मिल भी नहीं सकता । लीला कथा में छुपे रहस्य , गूढ़ अर्थ तत्वार्थ की विवेचना उनकी कथा की विशेषता है । गुरुदेव की भागवत कथा में विज्ञान के सभी पहलुओं की तुलनात्मक विवेचना होती है । वे घोषित करते हैं कि विज्ञान का कोई ऐसा विषय नहीं जो भागवत में न हो , विज्ञान जहां तक अभी पहुंचा है वहां से बहुत आगे की बात भागवत करती है । गुरुदेव की चुनौती है कि विज्ञान के विद्यार्थी एवं विद्वतजन जो भी इन विषयों पर गवेषणा / विमर्ष करना चाहें अलग से आमंत्रित हैं ।
भागवत रहस्य तथा भागवत के मन्त्रों के मानव शरीर पर दिव्य प्रभाव को प्रकाशित करने हेतु गुरुदेव ने भागवत शोध संस्थान की स्थापना की । गुरुदेव की अन्य महत्वपूर्ण बात रूढ़िवादिता को निर्मूल कर भागवत के उज्जवल धर्म ( प्रोज्जित धर्म ) की स्थापना है । किसी भी कथा के प्रारम्भ में वे आग्रह करते हैं कि जिनके जिनके मन में जो जो शंकाएं या प्रश्न हो वे उन प्रश्नों को एक कागज़ पर लिख कर जेब में रख कर कथा श्रवण करें , कथा विश्राम तक उन्हें उनके प्रश्नों का उत्तर मिल जाएगा । यदि किसी को शंका हो कि उनका उत्तर नहीं मिला तो रिकॉर्डिंग देख कर पुष्टि करें या करवा लें । बड़ी संख्या में लोगों नें इस माध्यम से भी अपना कल्याण किया ।
गुरुदेव ने सभी से प्रश्न आमंत्रित किये है और जो प्रश्न लोक हित में होते हैं उन प्रश्नों पर प्रवचन माला में वे पूरा प्रवचन / सत्संग कर रहे हैं । गुरुदेव लंबे वर्षों से जन मानस में प्रबोध जागृत कर मानव जीवन की परम उपलब्धि -आनंदपूर्ण जीवन- तक पहुंचाने हेतु वृहद् अभियान में हैं ।

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