आपका जीवन साथीकौन ?

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आपका जीवन साथीकौन ?
Who is your life partner ?

अगर स्थायी निराकरण चाहते हो तो किसी स्थायी के साथ अपना रिलेशन बढ़ाओ l इस दुनियाँ में स्थायी कोई नहीं है – तुम्हारे घर द्वार , माता पिता , भाई बहन , पत्नी पुत्र , मित्र , नातेदार , रिश्तेदार, व्यापार, कार – कोई भी स्थायी नहीं हैं l आज हैं कल नहीं , अभी हैं अगले पल नहीं ,- तो स्थायी कौन है ?
स्थायी केवल राम और कृष्ण हैं और इनका नाम है – क्या तुमनें इनके सस्था मित्रता बढ़ाई ? इनके साथ तुम्हारी दोस्ती हो गयी ? इनके साथ तुम्हारा गठबंधन हो गया ? इनके साथ सात फेरे ले लिए ? मित्रता करनी हो तो सुग्रीव की तरह करो l सुग्रीव ने भी मित्र बनाया पर परमात्मा को बनाया l
मित्रता कोई साधारण चीज नहीं है भैय्या l
देखो यह राम चरित मानस हमको एक बहुत बड़ी चीज सिखाती है : हनुमान जी द्वारा अग्नि को जला कर राम और सुग्रीव दोनों का गठबंधन हुआ और गठबंधन करके सात फेरे लिए l हमने तो आज तक यही सुना था कि जिसकी शादी होती है – वर और कन्या गठबंधन करके सात फेरे लेते हैं तो क्या सुग्रीव से विवाह हो रहा था राम का – सुग्रीव कन्या हैं या राम कन्या हैं ? , किसका विवाह हो रहा था ? क्योंकि सुग्रीव नें राम के कंधे पर अपने पूंछ को रखा था और राम उस पूंछ को पकडे हुए थे और उसे लेकर गठबंधन के सात फेरे लगा गए – आखिर क्यूं ? मानो भगवान सिखा रहे हों कि भैय्या दुनियाँ में अगर सच्चा गठबंधन और अग्नि का फेरा हो सकता है तो वह केवल परमात्मा के साथ हो सकता है क्योंकि स्थायी वही है – ” ऐसे वर को क्या वरूँ जो जन्मे और मर जाय ? ” ऐसे वर को क्या वरना है जो आज जन्म लेगा और कल मर जायगा – तो मीरा ने ऐसे वर को वरण किया – कौन – श्री कृष्ण को मैंने पति बना लिया l
वैसे अगर मित्र ही बनाना चाहते हो तो कृष्ण और राम से बेहतर मित्र और कौन हो सकता है ? राम ने मित्रता की परिभाषा दी सुग्रीव के साथ l
अगर मित्र बनाना चाहते हो तो परमात्मा को ही मित्र बनाओ और अग्नि के फेरे उनके साथ ही लो , गठबंधन उनके साथ ही करो , वही तुम्हारे सच्चे मित्र हैं l
जब प्रबोध आया हनुमान जी को – मानो सीता माता ने गुरु बन कर उनको प्रबोध दिया – अरे , आज तेरी भक्ति दाँव पर लगी है – रघुपति की भक्ति दाँव पर लगी है – ज्ञानी , ध्यानी छोड़- तू भक्त है भगवान का – अगर आज तूने उत्तर न दिया तो रावण की सभा में सब तुमको धिक्कारेंगे, रावण मुस्कुराएगा – हँसेगा – जिसको ज्ञानी नाम अग्रगण्यम कहते हैं – यही है राम का भक्त — उस समय प्रबोध हुआ हनुमान जी को और हनुमान जी ने दोनों हाथ उठा कर कहा “दासोहम कौशालेंद्रस्य ” ऐ सुन रे रावण – मैं दास हूँ कौशलेन्द्र भगवान श्री राम का l रावण हँसा – नौकर ! आर यू स्लेव ? सर्वेंट ?
अरे ! मैं तो समझता था कहीं का राजा होगा , बड़ा विज्ञानी ज्ञानी होगा , बड़े देश से आया हुआ कहीं का सूरमा होगा , हिन्द केशरी होगा , आर यू स्लेव ? तू एक दास है नौकर है तो हनुमान जी को पुनः प्रबोध दिया माता जानकी नें फिर उस समय दोनों हाथ उठा कर , मुट्ठी बांधकर हनुमान जी नें कहा – ” सुन रावण – तू नाम का दास , तू चाम का दास , तू तू काम का दास , तू दाम का दास – तुझसे अच्छा मैं हूँ – मैं हूँ श्री राम का दास l
श्री राम का दास होना अच्छा है l जीवन में नाम के दास , चाम के दास – काम के दास , दाम के दास — हम सब काम के दास हैं , चाम के दास हैं , नाम के दास हैं – कोई नाम के लिए मरा जा रहा है – हमारा नाम नहीं होगा – मरे जा रहे हैं मर जा – नाम के लिए मरा जा रहा है — अरे इस दुनिया में एक ही नाम है – श्री राम और कृष्ण – औरदूसरा कोई नाम नहीं है l कई बार अपनी कथाओं में कहता हूँ –अपने पर दादा के परदादा के परदादा का नाम बताओ , उनके दादा जी का नाम बताओ , उनके दादा जी का नाम बताओ — कहाँ गया नाम – इतने कृतघ्न हो – अपने बाप के बाप के बाप के बाप के बाप
के बाप के बाप के बाप के बाप के बाप के बाप के बाप का नाम नहीं जानते – मिट गया , एक दिन तो बहुत चला , तीन दिन तक तो बहुत चला, फोटो भी चली , छवि भी चली पर अब गए काम से – सब गया, नहीं है — इसलिए नाम भी मिटने वाला है , तुम्हारे ये चाम भी मिटने वाले हैं – अग्नि की लपटों पर चमड़े जब जलेंगे तो तुम्हारे ही बेटे बेटी रिश्तेदार उसकी गंध को बरदाश्त नहीं कर पाएंगे – मुर्दा जब जलता है तो लोग नाक पर रूमाल रखते हैं क्योंकि चमड़े और मांस के जलने की गंध आती है l ये चाम भी नहीं रहेगा , ये नाम भी नहीं रहेगा , काम भी नहीं रहेगा , दाम भी नहीं रहेगा l इस दुनिया में अगर कुछ था , है और रहेगा तो केवल राम ही राम रहेंगे इसलिए अगर मित्रता करनी हो प्रेम करना हो , सुनना हो तो श्री राम को चुन लो , श्री राम से विवाह कर लो , श्री राम के साथ सगाई कर लो , श्री राम को अपना वर बना लो l
अरे ! हमारे ठाकुर तो ऐसे हैं किपत्नी भी बनाने को राजी हैं – मैं कई बार कह चुका हूँ कि वह सक्खू बाई के यहाँ जाकर पत्नी बने जहां उसकी सास इतनी प्रताड़ना दिया करती थी lइसलिए कह रहा हूँ कि इस जीवन में अगर मित्रता करनी हो , अगर प्रेम करना हो तो केवल और केवल राम कृष्ण से करो – वही जीवन में तुमको प्रबोध देंगे , तुमको प्रेम दे सकते हैं और उन्ही के साथ रिश्ता तुम्हारा चिरस्थायी हो सकता है l

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