सत्संग 05.09.16 भाग 3

Events Guruvani

जो ठाकुर के लिए रोते हैं उनका रोना भी उपासना बन जाता है , जो ठाकुर के प्रेम में बिरही होकर और विरह उन्माद में नाचते गाते उछलते रोते हुए चिल्लाते हैं उनके भाग्य की सराहना कौन कर सकता है ? जगत नें तो उन्हें सदा से उन्मादी कहा है – किसी एक भक्त का नाम लो – सबको लोगों ने पागल कहा है – कबीर मीरा तुलसी नानक जनाबाई रैदास ये सब – नामदेव – ये सब उन्मादी हैं , कब हंस रहे हैं कब रो रहे हैं कब उछल कर कीर्तन कर रहे हैं कब हरिकथा में डूबे हुए हैं कब हा कृष्ण हा कृष्ण कह कर वृक्षों से लिपट जाते हैं ।
चैतन्य महाप्रभु की उस उन्मादी अवस्था का तो ज़रा चिंतन करो – दौड़ते हुए जाते हैं – हा कृष्ण – हा मोरे बाप – कोथाए गेले , और कह कर किसी वृक्ष से लिपट जाते हैं और इतनी तेजी से जाते हैं कि वृक्ष से चोट लगती है धड़ से , रक्त बह निकलता है माथे से , उनके शिष्य जाकर उठाते हैं – ये क्या हो गया हमारे गुरुदेव को – उनकी देख भाल करते हैं ।
आपमें से कई लोग इस बात को जानते होंगे – महाप्रभु का अंतिम समय पुरी में – बैठे हुए हैं -समुद्र के किनारे – गंभीर – श्याम सुंदर का चिंतन कर रहे हैं और अचानक नीले समुद्र को देख कर – सागर को देख कर भगवान श्याम सुंदर की यादें प्रबल हो गयीं अंदर में और बैठे ही बैठे अचानक छलाँग लगा दिया – हा कृष्ण – हे श्याम सुंदर ! और महाप्रभु उसी सागर में विलीन हो गए – श्याम सुंदर की बाहों में ।
मीरा द्वारिका में कृष्ण के विग्रह के भीतर चली गयी – मुख में – बंद कमरे में । हजारों लोग मौजूद थे , दरवाजा बंद था और मीरा कृष्ण में समा गयी, चुनरी बची रह गयी , प्रमाण था – लाखों लोगों ने देखा ।
इसलिए मैं कहता हूँ कि ठाकुर सर्वशक्तिमान हैं , हमारे तुम्हारे चिंतन में जो कभी नहीं आ सकता , तर्क की कसौटियों पर कभी ठाकुर के प्रेम को कसा नहीं जा सकता , ठाकुर तो भाव से ही पकड़ में आते हैं – आज तक किसी बुद्धिमान , ज्ञानवान ,यशवान , धनवान – इनको ठाकुर न मिले , यह अलग विशेषता होगी उनकी पर ठाकुर जिसको भी मिले उसकी भावना के कारण मिले , उसके अश्रुबिंदु के कारण मिले ।
ये अश्रु क्या हैं – ये अश्रु तुम्हारे हृदय के मैल हैं -जो विकार हैं तुम्हारे हृदय में – जब श्याम सुंदर और श्री राधा की याद में , उनकी विरहाग्नि में जलते हुए अश्रुपात होते हैं तो हृदय की वह सब मालिनताएं बाहर निकल जाती हैं और जैसे ही हृदय निर्मल होता है , ठाकुर परिलक्षित हो जाते हैं , ठाकुर से हमारी मुलाकात हो जाती है ।
इसी लिए तो मैंने सुना है :-
ये इश्क़ नहीं आसान
बस इतना समझ लीजे ,
आग का दरिया है ,
और कूद कर जाना है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Rating*