रिश्तों को कैसे स्वस्थ और आनंदित बनाएँ

Guruvani

श्रीकृष्ण का जीवन 125 वर्ष का है , उनका जीवन मत बोलो , मृत्यु मत बोलो – भगवान की मृत्यु होगी कैसे , उन्होंने लीला 125 वर्षों तक किया , इस धराधाम पर 125 वर्ष तक रहे -वह लीला की उनकी आयु है । 125 वर्ष में एक रात्रि महारास हुआ । अब मैं व्यापक अर्थ में नहीं जाता – वरना वहाँ तो ब्रह्मा की एक रात्रि है – कई अरब , कई करोड़ वर्ष हैं एक रात्रि में – । 125 वर्ष की लीला में एक रात्रि उन्होंने महारास किया ।
अब कृष्ण के ऊपर जितने भी प्रश्न आज उठते हैं तो 124 साल और 364 दिन भगवान की जो प्रज्ञा है –
हमको रास समझ में नहीं आता इसलिए हम गाली देते हैं – चलो मान लिया कि तुमको रास समझ में नहीं आता – रास लड़के लड़कियों के डाँस का एक फॉर्म है – यही तो निन्दा है श्रीकृष्ण की – ज्यादातर भागों में कृष्ण निंदा महारास के कारण है । अरे यह महारास , उनकी ये पत्नियाँ , उनका वो , उनका वो – जितनी भी निंदाएँ हैं श्रीकृष्ण के उस एक रात्रि के महारास के कारण है ।
124 साल यही कृष्ण गीता भी कह रहे हैं, यही कृष्ण अर्जुन के मोह का भी शमन कर दे रहे हैं , यही कृष्ण बैठे हुए उद्धव के मोह को मिटा दे रहे हैं , यही वो कृष्ण हैं – जब उनके परिवार वाले आपस में लड़ रहे हैं , रक्त गिर रहे हैं – ठाकुर पाँव पर पाँव चढ़ाए उद्धव को गीता सुनाए जा रहे हैं – सुन उद्धव भक्ति योग अपनाना , भक्ति में बहुत अच्छी बात है गुरु को आगे मानना – हद हो गयी , जिसको पैदा किया – गिर गया , कट गया , मर गया – अब यह क्वालिटी श्रीकृष्ण की कोई देख सकता है , कोई समझ सकता है ?
पैर में थोड़ा चोट लग जाय तो कितनी पीड़ा होती है , हर वक्त याद रहता है – चोट में अगर किसी को सत्संग याद रहे , चोट में अगर किसी की भलाई याद रहे , चोट में भी अपने व्यवहारों का नियंत्रण ठीक ठीक आप कर सको , चोट में भी आप समता के साथ जी सको , जिसने आपका बहुत नुकसान किया है उसकी तरफ भी आपकी दृष्टि समता की हो तब तो……. !
पति पत्नी प्रेमी नहीं होते इसी लिए उनको तकलीफ होती है , अगर प्रेमी हो जाँय वास्तव में तो उनको कभी तकलीफ न होगी , तब वे एक दूसरे की कमियों को नहीं – उस समय खूबियों को ढूंढ रहे होते हैं , उस समय जब सगाई हुई थी तब खूबियां ढूंढते थे , उस समय सब कबीर होते हैं , सब जनाबाई होती हैं – आज वे वही हैं बल्कि पहले से बेहतर हैं अब – क्योंकि अब तुम्हारे साथ हैं फिर भी हमारी दृष्टि उनकी कमियों की और लग गयी है ।
श्रीकृष्ण और गोपी जब प्रेम करते हैं तो कॉज़लेस लव की बात है , प्रेम है – पर अपेक्षा रहित है और लव ( प्रेम )तभी तक खड़ा भी है जब तक कॉज़लेस – अपेक्षा रहित है । कॉज़ (कारण ) आया तो वो ( लव) – प्रेम न रहा लस्ट lust हो गया — इतना ही तो अंतर है – काम और राम में , इतना ही तो अंतर है प्रेम और काम में । कामी चाहता है मैंने इसके लिए इतना किया तो क्या ये मेरे लिए इतना भी नहीं सोच सकता – तुम प्रेमी थे , कामी बन गए – बड़ा पतन हो गया तुम्हारा ।
और यदि कोई कामी किसी के लिए कुछ करके और यह सोचे – मेरा क्या , वह तो प्रसन्न है न मेरे काम से , एक ही मिनट में कामी से प्रेमी बन गया वह ।
यह बहुत बड़ी यात्रा नहीं है ।
लोग सिखाते हैं – काम से प्रेम की ओर जाना बड़ी लंबी यात्रा है – मैं तो कहता हूँ – सेकेण्डों की यात्रा है , क्षण की यात्रा है ।
अगर उसके प्रति प्रेम प्रदर्शित करके – उससे प्रेम करके अपेक्षा न रही तो उसी समय तुम कृष्ण हो गए , उसी समय गोपी हो गए और उसके लिए दुनियाँ का सबसे बड़ा काम तुमने कर दिया ।
देखो ! कृष्ण ने यह कहा कि मैं कृतघ्नों को माफ़ नहीं करता – यह कृष्ण नें कहा है तो वह उसके ऊपर छोड़ दो न – तुम क्यों परेशान हो – अगर वह कृतघ्नता करता है तो वह उसके और कृष्ण का व्यापार है , उसके और कृष्ण का सम्बन्ध है । तुम कहोगे मैं उसका नुकसान भी तो नहीं चाहता पर तुम कर भी क्या सकते हो , तुम्हे जो करना था कर लिया , तुम्हें जो समझाना था उसे समझा दिया – ज्यादा पजेसिव होते हो तो ज्यादा दूरी बढ़ती है ।
अगर जीवन में ऐसा कोई व्यक्ति है जिसे तुम प्रेम करते हो और तुम कह रहे हो वह नहीं मानने के कारण , या जितना तुम प्यार कर रहे हो उसको नहीं समझने के कारण उसको तकलीफ हो सकती है – यह तुम्हारी तकलीफ हो सकती है – हो सकता है उसका कुछ बिगड़े नहीं । यदि तुम उसका हित चाहते हो पर वह समझने को राजी नहीं और तुम सोचते हो की वह तकलीफ पाएगा – तो पता चला वह तो जीवन भर तकलीफ न पाया और यह सोच सोच के पूरा जीवन तकलीफ तुम पाते रहे ।
तुम प्यार करो यह तुम्हारे अधिकार में है पर कोई तुम्हे प्यार करे यह तुम्हारे अधिकार में नहीं है , तुम उसका भला सोचो – उसके लिए अच्छे काम करो यह तुम्हारे अधिकार में है पर वह स्वीकार कर ले वह उसके अधिकार में है ।
अगर उसे दुःख ही पाना है और वह तुम्हारी बातों को नहीं मानता तो तुम क्यों दुखी हुए बैठे हो वो तो तुम्हारी बात न मान कर – वह तो जानता भी नहीं कि मानना कि नहीं मानना – इसके कारण भी दुखी है और तुम अच्छा करके भी दुखी हो !
मैंने तो सुना है कि जो अच्छा करते हैं वह सुखी रहते हैं तो अगर वास्तव में तुम अच्छा कर रहे हो तो तुम्हें दुखी नहीं होना चाहिए । ……

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