दुःख का एकमात्र कारण

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………. शून्य में होओ , और जब तुम शून्य में हो तभी परमात्मा उतरेगा , जब तुम शून्य में रहोगे तभी तुम्हारे जीवन का आनंद तुम्हारे भीतर उतरेगा …….. कचरे भरे पड़े हैं – कहाँ से उतरेगा कोई , ऑलरेडी ऑक्युपाइड
है – कहाँ से कोई आएगा ,
तुम लिखो तो खाली करके घर को ‘टु लेट’ – ‘खाली है’ – आ जाओ – तब तो आनंद उतरे ।
हम पहले से भरे भराए हैं , पहले से पूरे कचरे , गन्दगी को अंदर रखे हुए हैं और मंदिरों में जाकर रोए जा रहे हैं ‘मेरे ऊपर ध्यान नहीं दे रहे हो , क्या कर रहे हो , यह मेरे दुःख का कारण है – पूतनी मेरे दुःख का कारण है , सास मेरे दुःख का कारण है , मुझे पैसा नहीं मिल रहा , मेरा बेटा पढ़ नहीं रहा , मेरे बेटे का यह हो गया , मेरे बेटे का वह हो गया’ – पता नहीं क्या क्या और सबसे पेट भर गया तो ” दुनियाँ बनाने वाले तूने काहे को दुनियाँ बनाई ” । अब किससे शिकायत – भगवान ही से शिकायत कर रहा है ” काहे को दुनियाँ बनाई ” – भगवान कहे – तेरे को परेशान करने को दुनियाँ बनाई , तू घूम परेशान होके ऐसे … “काहे को दुनियाँ बनाई , जब दिल ही टूट गया”
तो मर जाओ , जब टूट ही गया तो अब जी के क्या करोगे , सुना किसको रहे हो …. हद हो गयी …. ‘दुनियाँ में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा’ , ऐसे जीने से बढ़िया मारना – न हो चुल्लू भर पानी ! मेरे पास है – माँग लेना । क्या करोगे ? “दुनियाँ में हम आये हैं तो जीना ही पड़ेगा , हँस हँस के जहर को पीना ही पड़ेगा”—- क्यों पीयोगे जहर ? …
तुम अमृत की संतान हो । वेद घोषणा करता है –
“अमृतस्य पुत्रस्य”
, तुम अमृत की संतान हो और अमृत की संतान क्यों जहर पीयेगी ? – “हँस हँस के जहर को पीना ही पडेगा” — क्योंकि ‘मन’ ! मन को कभी न देखा , जिस मन नें तुम्हें इतना रुलाया , जिस बोझ ने तुम्हें इतना रुलाया है — मैं फिर से आख़िरी बार तुम्हें कहता हूँ – अगर तुम दुखों से मुक्ति चाहते हो तो सुन लो — चाहे दुनियाँ के किसी भी तीर्थ में चले जाओ , दुनियाँ के किसी पंडित और पुरोहित को दान करके चले आओ ( सुन प्रेमानंद ! मेरी इस वाणी को सबसे अधिक बूस्ट करना , लाखों लोगों तक पहुँचाना इसको )
मैं सबको कहता हूँ – तुम्हें जो उपाय करने हैं करके देख लो अगर तुम्हारे दुःख दूर हो गए तो मैं बैठा हूँ यहाँ पर तुम मेरे साथ जो सुलूक करना चाहो कर लेना पर अगर तुमने अपने मन को न देखा , अपने मन की ओर दृष्टि न की और अपने मन को न समझा पाए कि तुम्हारे दुखों का कारण और कोई नहीं यही है कलुषित मन है तो तुम्हे कोई सुखी नहीं कर सकता , कभी नहीं हो सकते सुखी इस जीवन में ।
इसलिए स्वीकार करो इस चैलेन्ज को – अककॉर्डिंग टु वेद , अककॉर्डिंग टु योर लिविंग मास्टर – जीवंत गुरु कह रहे हैं – अपने मन को देखना शुरू करो – दुनियाँ के ऊपर मत कुछ दोष लगाओ “मैं तो चाहता हूँ करना पर घर से मुझे उतनी सहायता नहीं मिलती ” – बेकार की बातें हैं , मत किया करो ऐसी बात । तुम चाहते हो और वह न होगा ! तुम्हारी चाहत है और वह न होगा । आज तक जो तुमने चाहा है – सक्सेस ऐट एनी कॉस्ट – लाशों की सीढ़ियाँ बना कर भी लोगों ने सफलता प्राप्त की है – तुम कहते हो – न होगा , तुम्हारी प्रायोरिटी नहीं है , तुम्हारी प्राथमिकता नहीं है । अगर प्राथमिकता हो और अपने मन को पहचान लो , मन की ओर दृष्टि दे दो तो जो जो तुम चाहते हो वही होगा पर चाहना भी क्या है वह गुरु के अनुसार ही चाहना नहीं तो तुम्हारी अनंत चाहतों का कोई ठिकाना नहीं , अंत नहीं …………

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