इस कलिकाल में भक्ति

Events Guruvani

हृदय में कृष्ण प्रेम की आग जला कर आओगे तो कृष्ण सामने खड़ा मिलेगा गोपियों की तरह – बोलेगा कृष्ण , बोलेंगे राम – इसी कलियुग में हजारों संतों को दर्शन हुआ । अभी वृन्दावन जाओ – अभी भी ऐसे ऐसे संत हैं जिनको रात्रि में राधा रानी आकर खीर खिला कर चली जाती हैं । गाँव से सात साल की लड़की आती है – लाली , ” बाबा – हमारी गैया ब्याओ है , माँ नें दूध भेजो है तुम्हारे ताईं , , हमारो नाम ये है , हमारे मैय्या को नाम ये है ” सुबह वो संत जाते हैं तो मैय्या कहती है कि वह तो महीने भर से अपनी नानी के यहाँ है , वह तो यहां है ही नहीं । हा किशोरी ! कह कर गिर पड़ते हैं संत – किशोरी मुझे दूध पिलाने आई । इसलिए वृन्दावन में तो राधारानी की छत्रछाया में ही – चाहे जितना बड़ा संत हो , गुरु हो – किशोरी जी की शरण में ही सब साधना करते हैं -राधे राधे करते हैं ।
राधा – कृष्ण से मिला देंगी और हनुमान – राम से मिला देंगे । बस समझने की जरूरत है – अगर भय के बदले प्रेम जागृत हो गया तो आपके पास पैसे नहीं हो सकते – शबरी के पास कहाँ थे ? आपके पास धन न होगा – सुदामा के पास कहाँ था ? आप शौचाचार नहीं कर सकते , नहा नहीं सकते , स्नान नहीं कर सकते – अब और कुछ बुज़ुर्ग हो जाओगे तो स्नान करना भी मुश्किल होगा – रोज न कर पाओगे तब क्या भगवान तुम्हें नहीं मिलेंगे – तो करमा बाई की खिचड़ी का क्या होगा जो जगन्नाथ खाते थे – बिना स्नान किये ,बिना शौचाचार किये , बिना पवित्रता – सुबह उठ कर बिना दातून किये खिचड़ी बनाती और जगन्नाथ दौड़ कर भात खाने आते थे ।
अगर स्नान करने से , आरतियाँ दिखाने से , तुम्हारे भयभीत होने से ही परमात्मा मिलें तो उनका क्या होगा – उन गरीबों का क्या होगा ?
पैसों से अगर भगवान मिल जाते तो जिंदल , मित्तल, टाटा , बिरला – ये छोड़ते भगवान को हमारे लिए ? भगवान को अपनी फैक्ट्री में बाँध कर रखते – कहते – खबरदार ! बिल गेट्स कहता तुम्हारा कितना है – कहते – एक अरब – कहता चलो फैक्ट्री में बैठो – आओ एक अरब देता हूँ ।
क्या मतलब है हनुमान को पैसे से , क्या मतलब है ठाकुर को पैसे से ? जो पैसे हम देते हैं वह तो पुंजअर्जियों के लिए देते हैं जो हनुमान जी की सेवा करते हैं और देना – जरूर देना – न देना भी ठीक नहीं , जो बैठे हुए हैं भगवत सेवा के लिए , मंदिर की सेवा कर रहे हैं – जैसे आप दूकान चलाते हो – आपकी वही रोजी रोटी है – उनका जरूर भरण पोषण करो पर यह मत समझो कि तुम्हारे उस रूपए के टुकड़े को कृष्ण , राम , राधा , सीता और हनुमान ग्रहण कर रहे हैं । भगवान उतने प्रसन्न तब नहीं होते जब उनकी सेवा करो बल्कि उनके भकटन की सेवा करो तब ज्यादा प्रसन्न होते हैं –“मोरे मन प्रभु अस बिस्वासा , राम ते अधिक राम कै दासा “

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Rating*