” इतने गंभीर क्यों” – “why so serious”

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इस दुनियाँ में गुरु और परमात्मा तुम्हें एक ही जोक सुना रहे हैं । यह सत्संग जोक है – हल्के फुल्के में लिया करो – तुम्हें हँसाने के लिए आता हूँ , तुम्हें मस्ती देने के लिए आता हूँ मैं । सीरियस हूँ भी नहीं – सीरियस की बात भी नहीं करता ।
सीरियसनेस कहाँ है यार – जगत के इस ड्रामा में सीरियस क्यों बनें – कौन सी सीरियसनेस है ? मैं ऐसा ही कहता हूँ सिंसियर रहो – कुली का रोल मिला है कुली का रोल निभाओ , राइस मिल के मालिक का रोल मिला है उसको निभाओ , पंचायत अध्यक्ष बने हो – निभा लो , गृहणी बनी हो – निभा लो ।
परमात्मा ने इतना बढ़िया तुमको ऐक्टर बनाया है लेकिन याद रहे कि तुम हो कौन ?
कई बार मैंने कहा है कि अमिताभ बच्चन कुली बनाता है पर उसको याद रहता है कि मैं अमिताभ बच्चन हूँ । पिक्चर में रोता है पर उसे याद है कि मेरा दुःख ऐसा थोड़े ही है मेरे पास तो कार लगे हुए हैं ।
ऐसे ही जीवन में तुम्हें भी बहुत सारे रोल दिए गए हैं , तुम नाहक ही इतने सीरियस होकर बैठ गए – यही मेरा घर , यही मेरा परिवार , यही मेरा बेटा – इसी के कारण ……… !
क्यों इतने सीरियस हो , तो जो चार दिन तुम रोए – जो तुम्हारा बेटा नालायक निकाला , उसकी नालायकी के कारण तुम रो रहे हो – उसके ऊपर तो कोई फर्क नहीं पड़ता , अपनी ज़िंदगी क्यूँ खराब कर रहे हो ? मुझे जवाब दो न – क्यूँ इतने सीरियस हो ?
अपने जीवन में तुम स्वयं की मस्ती के लिए आए हो और जिस दिन तुमने यह स्वीकार कर लिया कि मैं पहले स्वयं को देखूँगा , अपने मन को देखूँगा , मेरे दुःख का और कोई कारण नहीं है – मैं स्वयं ही कारण हूँ – और धीरे धीरे मैं अपने बोझ को उतारूँगा – मेरे ऊपर बहुत बोझ बढ़ गए हैं – नाम के , काम के , प्रतिष्ठा के – कितने बोझ टाँग कर बैठे हुए हैं ?
एक एक करके बोझ उतारिए – बोलिए – मस्ती करने आए हैं । क्या नाम है ? नाम का क्या ? – आज कुछ और , कल कुछ और , परसों कुछ और – नाम बदलता ही रहेगा ।
इसीलिए कृष्ण ऐसे आए हैं – न माँ का पता , न बाप का पता , न नाम का पता – दो सौ पाँच सौ नाम रख लिए हैं , दो चार बाप हो गए उनके , मैय्या कितनी वह भी पता नहीं , जनम लिया तो वहां से वहां , वहां से वहां भागा । कोई सीरियस नहीं हैं कृष्ण – बड़े नॉन सीरियस हैं।
हमारे कोई भी अवतार कभी सीरियस नहीं हुए जैसे तुम सीरियस हो जाते हो । पूरी सृष्टि करने वाला ब्रह्मा कभी सीरियस नहीं हुआ – तुम इतने सीरियस क्यों हो ।
सीरियसनेस नहीं सिंसियरिटी
लाओ ।

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