आरती का अर्थ

Guruvani

आपकी श्रद्धा को मैं प्रणाम करता हूँ कि आप आरती करने आए हैं । यहाँ पर एक बात समझना – समझ कर आरती करो । आरती का अर्थ होता है आर्त – आर्त शब्द से आरती बना था – वेदों से निकली हुई वाणी है आर्त । आर्त का अर्थ होता है भीतर के मन और प्राण से पुकारना । ये दीपक जो जलाते हो यह प्रतीक है । वास्तविक दीपक तो तुम्हारा हृदय है और राम और कृष्ण का प्रेम ही उसमें धधक रही अग्नि है । उन राम और कृष्ण के प्रेम की लौ को उस मीरा की तरह अपने हृदय में जोड़ोगे तो मैं सत्य कहता हूँ कि तुम्हारी हजारों थालियों और दीपक से आरती करने के बाद परमात्मा उतनें प्रसन्न न हुए होंगे पर हृदय में कृष्ण प्रेम की आग जला कर आओगे , आरती करोगे तो कृष्ण सामने खड़ा हो जाएगा गोपियों की तरह – बोलेगा कृष्ण – बोलेंगे राम जैसे इसी कलियुग में हजारों संतों को दर्शन हुआ ।

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