अहैतुकी भक्ति क्या है

Guruvani

…….अहैतुकी भक्ति का अर्थ है बिना किसी हेतु के भक्ति करना – कोई प्रयोजन नहीं , कोई हेतु नहीं , कोई डिमाण्ड नहीं , कोई माँग नहीं , कोई चाह नहीं — तुम मुझे चाहे दुखों में रखो या सुखों में – उससे कोई फर्क नहीं पड़ता पर सर्व अवस्थाओं में मैं सिर्फ तुमसे ही प्रेम करता हूँ और तुम्हारा ही आश्रय है।
तुम न चाहो – कोई बात नहीं पर मैं तुम्हें चाहता रहूँगा – यह अहैतुकी भक्ति का लक्षण है और यही भक्ति चाहे गुरु के प्रति हो या परमात्मा के प्रति – तुम्हें सर्व सिद्धि प्रदान कर सकती है ।……..

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